खेल प्रशिक्षण के कार्य | khel Prashikshan Ke Karya

शिक्षा और व्यक्तित्व का विकास:-

खेल प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ी के व्यक्तित्व का चौमुखी विकास करना है । क्योंकि खेल प्रतिस्पर्धा में उच्चतम संभव प्रदर्शन प्राप्त करने में एक अच्छे व्यक्तित्व का बहुत अधिक महत्व है व्यक्तित्व में कई विशेषताएं होती हैं जैसे संचालन निश्चय, संकल्प ,आत्मविश्वास, नेतृत्व , भावनात्मक परिपक्वता , प्रशिक्षित होने का गुण, विवेक और मानसिक दृढ़ता आदि का विकास खेल प्रशिक्षण और शिक्षा द्वारा किया जा सकता है । यह सभी घटक खिलाड़ी के चहुमुखी विकास और खेल प्रतियोगिताओं में उच्चतम प्रदर्शन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

खेल प्रशिक्षण (ट्रेनिंग ) के कार्य

खेल ट्रेनिंग के उद्देश्यों की पूर्ति एवं उनमें परिपूर्णता हासिल करना ही खेल ट्रेनिंग के मुख्य कार्य होते हैं उद्देश्य की पूर्ति खिलाड़ी सर्वश्रेष्ठ खेल प्रदर्शन की ओर अग्रसर होता है । खेल ट्रेनिंग के मुख्य उद्देश्य में शारीरिक दक्षता तकनीकी युक्ति एवं व्यक्तित्व आदि कारक संभव है और इन्हीं के योजनाबद्ध एवं क्रमबद्ध विकास से खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से शिखर तक पहुंचता है । अतः इन उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए खेल ट्रेनिंग के कार्यों को नीचे बतलाया गया है जो निम्न प्रकार के हैं ।

  1. खिलाड़ी के शारीरिक ट्रेनिंग के क्षेत्र में कार्य-

खेल ट्रेनिंग के माध्यम से खिलाड़ी की सामान्य दक्षता को क्रमबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है । शारीरिक ट्रेनिंग के दौरान चयनित खेलों के अनुसार खिलाड़ी की ताकत चाल सहनशीलता आदि शारीरिक योग्यताओं का विकास प्रदर्शन के दृष्टिकोण से श्रेष्ठ कार्य होता है । विद्यालयों में भी शारीरिक ट्रेनिंग के कार्य स्वास्थ्य को मजबूती प्रदान करना एवं सामान्य शारीरिक विकास प्राप्त करना होता है ।

2. खिलाड़ी की तकनीकी एवं युक्तिपूर्ण क्षेत्र में कार्य-

खिलाड़ी की खेल तकनीक एवं युक्ति पूर्ण प्रक्रिया तकनीक एवं युक्ति के शिक्षण कौशल एवं ज्ञान में परिपक्वता खेलों में उपलब्धि खिलाड़ी के खेल शैली विचार शैली आदि के कार्यों पर सीधा निर्भर करती है खिलाड़ी के शारीरिक योग्यता के विकास के अगले क्रम खेल ट्रेनिंग के माध्यम से प्रशिक्षक द्वारा चयनित खेलों की तकनीको एवं युक्तियों को विकसित किया जाता है यह विकास तभी संभव है जब खेल ट्रेनिंग के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं को ध्यान में रखकर खिलाड़ियों को क्रमबद्ध एवं योजनाबद्ध प्रशिक्षित किया जाए ।

3. खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग के क्षेत्र में कार्य-

खेल ट्रेनिंग का मुख्य कार्य खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक ट्रेनिंग भी होता है इसी के अंतर्गत खिलाड़ी के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास सम्मिलित है इस व्यक्तित्व विकास में खिलाड़ी की आदत व्यवहार दैनिक कार्यक्रम नियमों का ज्ञान आत्म नियंत्रण विरोधी के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा करते समय मनोदशा डर चिंता कुंठा रुचि नियंत्रण आदि तथ्य निहित है जिनका खेल ट्रेनिंग के माध्यम से विकास करना है प्रदर्शन विधि में सहायक होता है व्यक्तित्व आदत व्यवहार दैनिक क्रियाकलाप अनुशासन कह लाता है।

4.दैनिक दिनचर्या नियंत्रण-

खेल ट्रेनिंग के सफलता के लिए यह आवश्यक है कि खिलाड़ी की दिनचर्या नियमित की जाए खाने का निश्चित समय खाली समय में ऊर्जा का व्यय ना करना, सोने जागने का सही समय इन सब कार्यों के लिए प्रशिक्षक के निरीक्षण तथा खिलाड़ी के आत्मानुशासन की आवश्यकता होती है।

5. खेल ट्रेनिंग का मूल्यांकन-

खेल ट्रेनिंग प्रशिक्षण के द्वारा योजनाबद्ध नियमित तथा मूल्यांकन किया जाता है । खिलाड़ी की सफलता के लिए प्रशिक्षक उसका नेतृत्व करता है । प्रशिक्षक चिकित्सा मनोविज्ञान तथा यांत्रिक के विशेषज्ञों से खिलाड़ी के प्रदर्शन के विकास के लिए सलाह प्राप्त करता है । प्रशिक्षक ही प्रशिक्षण की गतिविधि के संगठन के लिए जिम्मेदार होता है । एक प्रशिक्षक खिलाड़ी के लिए दोस्त गुरु तथा निर्देशक का कार्य करता है।

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