योग

स्वामी सत्यानंद सरस्वती का जीवन परिचय | Swami Satyananda Saraswati ka Jivan Parichay

परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती जन्म से ही फकीरी थे और एकांतवास में रहे थे । इनका जन्म 25 दिसंबर 1923 ईसवी में अल्मोड़ा के निकट हिमालय की तराही में स्थित एक गांव में हुआ था। यह उत्तराखंड में पैदा हुए और गरीब किसान परिवार में जन्मे थे। इनमें बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा थी। भैरवी […]

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स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय | Swami Ram Krishna Paramhans Ka Jivan Parichay

स्वामी रामकृष्ण परमहंस महान योगी थे । इनका जन्म 18 फरवरी सन् 1833 में बंगाल प्रांत के कामारपुर नामक गांव में हुआ। इन के बचपन का नाम गदाधर था। गदाधर बचपन से ही चंचल स्वभाव के थे। उन्हें बचपन से ही अपने अंतर्मन की दिव्य अनुभूतियों का अनुभव होने लगा था। जून अथवा जुलाई 1848

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महर्षि पतंजलि का जीवन परिचय | Maharishi Patanjali Ka Jivan Parichay

योग का अलौकिक ज्ञान रखने वाले महर्षि पतंजलि ने योग को एक रूप में संजोकर मानव जाति के लिए प्रस्तुत किया मानव जाति की वर्तमान समय में योग की आवश्यकता को उन्होंने भली-भांति पूर्ण किया पतंजलि योग सूत्र इनके द्वारा रचित एक सर्वश्रेष्ठ कृति है इसमें आप योग के बारे में विस्तार से पढ़ कर

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पतंजलि योग सूत्र समाधी पाद से सम्बंधित सभी शोर्ट प्रश्न उत्तर

पतंजलि योग सूत्र के प्रथम पाद के सभी शोर्ट प्रश्न उत्तर आप इस पोस्ट में पढ़ सकते। प्रश्न 1 – योग सूत्र के अनुसार चित्त की भूमिया कितने प्रकार की होती हैं?उत्तर – चित्त की भूमिया पांच प्रकार की होती हैं। 2- योग सूत्र के अनुसार चित्त के कितने प्रकार होते हैं?उत्तर – योग सूत्र

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पंचकोश क्या है और किसे कहते है

पंचकोश क्या है आध्यात्मिक विज्ञान के अनुसार मानव शरीर 5 आयामों (शरीरों) कोशो से मिलकर बना होता है जो मानव शरीर के स्थूल से सूक्ष्म आयामों के लिए उत्तरदाई है।  इन्हें ही पंच कोष कहते है।पंचकोश पांच प्रकार के होते हैं1 अन्नमय कोश2 मनोमय कोश3 प्राणमय कोश4 विज्ञानमय कोश5 आनंदमय कोश अन्नमय कोश क्या है

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108 गायत्री मंत्र जाप के चमत्कारी लाभ | Benefits of Chanting Gayatri Mantra hindi

गायत्री मंत्र     ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । गायत्री मंत्र का अर्थ हम उस ईश्वर आराध्य का ध्यान स्मरण करते हैं जो महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ऊर्जा (प्राण) का अवतार करने वाला, दुख का नाश करनेवाला, खुशी को मूर्त रूप देनें वाला, वह हमें प्रबुद्ध व प्रकाशित (रोशन) करें। गायत्री मंत्र

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पतंजलि योग सूत्र के अनुसार आकाश का स्वरूप क्या है ?

पंचभूत किसे कहते है – पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश यह पंचभूत कहते हैं। इनमें से हर एक की पांच अवस्थाएं होती। अर्थात अपना अपना रूप होता है। पंचभूत का स्वरूप – इन पांच भूतो के जो लक्षण है वह इनकी स्वरूप अवस्था कहलाती है जैसे पृथ्वी की मूर्ति ओर गंध, जल का गीलापन

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वातसार

1. (क) वातसार अन्तधौति विधि – किसी सुविधाजनक आसन में  बैठकर, मुंह खोलकर कीवे की चोंच जैसा आकार बनाइये । नाक से श्वास छोडिये॰, मुँह से वायु को धीरे- धीरे पीकर उदर में भरने का प्रयत्न कीजिए। यह काकी मुद्रा कहलाती । यह क्रिया कठिन नहीं है, परन्तु इसमें अभ्यास की जरूरत है । वायु

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आसन का अर्थ, महत्व, एवं उद्देश्य

आसन का अर्थ आसन का पहला अर्थ बैठने का स्थान से है और आसन से दूसरा अभिप्राय शरीर की अवस्था से है। बैठने से अभिप्राय दरी, मृगछाल , चटाई आदि से है अर्थात जिसके ऊपर हम बैठते हैं। आसन का दूसरे अर्थ से अभिप्राय सुख पूर्वक शांति पूर्वक एवं स्थिर पूर्वक बैठने से है अर्थात

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आहार क्या है और संतुलित आहार का हमारे जीवन में क्या महत्व है ?

आहार क्या है आहार संभवो देह: आहार से ही संपूर्ण शरीर का निर्माण होता है और आहार से ही यह शरीर चलता है। आहार का हमारे जीवन में विशेष महत्व है बिना आहार के व्यक्ति के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। शास्त्रों में शरीर को मंदिर की संज्ञा दी गई है और इस

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