हठयोग के साधक तत्व | Yog Ke Sadhak Tatva

हठयोग में साधक तत्वों का परिचय

हठ प्रदीपिका के अनुसार 6 साधक तत्व बताए गए हैं। जो इस प्रकार हैं । उत्साह, साहस, धैर्य, यथार्थ ज्ञान, संकल्प तथा लोक संघ का परित्याग 6 तत्वों से योग की सिद्धि होती है। अतः यह योग के साधक तत्व है।

उत्साह

योग साधना में लीन होने के लिए उत्साह रूपी मनोज स्थिति का होना आवश्यक है। उत्साह भरे मन से कार्य आरंभ करने से शरीर मन व इंद्रियों में प्राण संचार होकर सभी अंग साधना में कार्यरत होने में प्रेरित हो जाते हैं। अतः उत्साह रूपी मनोस्थिति सफलता की कुंजी है।

साहस

योग साधना मार्ग में साहस भी गुण होना चाहिए। साहसी साधक योग की कठिन क्रियाओं जैसे वस्त्र धौति, शीर्षासन, केवली, प्राणायाम आदि की साधना कर सकता है। साहसी साधक इन सभी से भयभीत नहीं होता।

धैर्य

योग साधक में धीरता का गुण होना चाहिए। यदि साधक रातों-रात साधना में सफलता चाहता है तो ऐसा अधीन साधक बाधाओं से गिरकर पथभ्रष्ट हो सकता है। साधक को गुरु उपदेश से संसार की बाधाओं या आंतरिक स्तर की विपदाओं से धैर्य पूर्वक निराकरण करना चाहिए।

तत्वज्ञान

योग मार्ग पर चलने से पहले आवश्यक है कि साधक साधना मार्ग का उचित ज्ञान शास्त्रों व गुरु उपदेशों द्वारा ग्रहण करें । भली-भांति ज्ञान न होने पर साधना में समय भी नष्ट होगा । वह नाना प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होकर मन को विचलित करेंगी।

दृढ़ निश्चय

किसी सांसारिक कार्य को आरंभ करने से पहले दृढ़ निश्चय की भावना आवश्यक है। जहां निश्चय में ढील हुई वही मार्ग बाधक हो जाएगा । इसीलिए व्यक्ति को सोच समझकर ही दृढ़ निश्चय करना चाहिए।

जनसंघ परित्याग

सामाजिक धार्मिक स्तर पर उत्पन्न बाधाओं से बचाव हेतु अधिक जनसंपर्क त्यागना चाहिए । अधिक जनसंपर्क से शारीरिक व मानसिक ऊर्जा का ह्रास होता है जिससे योग साधना द्वारा प्राप्त उर्जा में कमी आ जाती है। जन संघ परित्याग से हिंसा लोभ मोह ईर्ष्या द्वेष नकारात्मक वृत्तियों को करने में सहायता मिलती है। साधना हेतु अधिक जनसंपर्क त्यागने योग्य है।

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