आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व :-
शिक्षा को परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। शिक्षा से व्यक्ति मानव जीवन के संकुचित अनुभवों से मुक्ति पा लेता है। समस्याओं से निकलने का उचित तरीका शिक्षा से ही प्राप्त होता है। आज के युग में शिक्षा का महत्व जीवन के हर पहलू में है। शिक्षा से समग्र व्यक्तित्व विकास होता है। शिक्षा पुष्प एवं संतुलित व्यक्तित्व का विकास करती है। जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलू आ जाते हैं।
शहजाद शक्तियां तथा प्रकृति प्रदत्त योग्यताएं :- प्रेम, अनुराग, जिज्ञासा, कल्पना कुछ सहजात प्रकृतिया है, जो मानव के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। शिक्षा इनके विकसित होने और उन्हें एक उचित दिशा प्रदान करने में मदद करती है।
- शिक्षा हमारे व्यवहार में परिवर्तन लाती है।
- शिक्षा नैतिक तथा चारित्रिक विकास करती है।
- शिक्षा से पर्यावरण अनुसार अनुकूल वह परिवर्तन होता है।
- शिक्षा में उच्च जीवन जीने के लिए तैयार करती है।
- शिक्षा के अनुभवों का पुनर संगठन व पुनर रचना होती है।
- शिक्षा से मूल संवेग की पूर्ति नियंत्रण तथा परिष्करण होता है।
- शिक्षा से सामाजिक विकास तथा सामाजिक कल्याण होता है।
- शिक्षा से संस्कृति एवं सभ्यता का परीक्षण होता है।
सभी देशों को अपनी सांस्कृतिक विरासत या सभ्यता पर गर्व है और इसे बचाए रखने के लिए वे बड़े-बड़े तथा सह भावपूर्ण प्रयास करते हैं । इनके परीक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं और इससे राष्ट्रीय विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे संप्रेषित करती रहती है।
सामाजिक पुनरुत्थान- शिक्षा सामाजिक सुधारों से सरोकार रखती है और समाज में फैले अंधविश्वास तथा अनुपयोगी परंपराओं जिन से समाज का विकास तथा उन्नति प्रभावित हो उन्हें उखाड़ सकती हैं।
शिक्षा से व्यवसायिक कार्य कुशलता में वृद्धि होती है। शिक्षा से आत्मनिर्भरता की उपलब्धि होती है। अच्छी शिक्षा से अच्छे नागरिक का निर्माण होता है । अच्छे नागरिक से अच्छे देश का निर्माण होता है । शिक्षा हमें व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती है । शिक्षा से मनुष्य को सामाजिक दक्षता प्राप्त होती है । शिक्षा से नेतृत्व करने की क्षमता बढ़ती है । शिक्षा से राष्ट्रीय विकास होता है । शिक्षा से राष्ट्रीय में अनुशासन बना रहता है । शिक्षा में आर्थिक निर्भरता प्रदान करती है ।
शिक्षा मानव मूल्यों का संवर्धन करती है शिक्षा शोध एवं विकास को प्रोत्साहन करती हैं शिक्षा मनुष्य को आधुनिकरण से कदम मिलाना सिखाती है । स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र का विकास कर व्यक्ति को उदारता की ओर ले जाना है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार सभी शिक्षण तथा परीक्षणों का अंतिम लक्ष्य मानव का चरित्र निर्माण बुद्धि विकास एवं मन की शक्ति बढ़ाने का है।
गांधीजी के अनुसार “सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चों की आध्यात्मिक बौद्धिक तथा शारीरिक क्षमता को तैयार करती है ।”
श्रीमती एनी बेसेंट के अनुसार – “शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के संबंधों को बढ़ाने तथा उन्हें इस प्रकार विकसित तथा प्रशिक्षित करें कि वह समाज का एक उपयोगी संस्कृत अच्छा सदस्य बन जाए शंकराचार्य के अनुसार शिक्षा का मूल उद्देश्य मनुष्य के शारीरिक व मानसिक विकास व बुद्धि विकास द्वारा मनुष्य के अंदर विद्यमान ईश्वर की प्राप्ति की प्रेरणा शिक्षा के द्वारा ही संभव है और तभी मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है ” ।