सुनियोजित शारीरिक शिक्षा के द्वारा विद्यार्थियों की व्यक्तित्व के विकास के लिए सभी पहलुओं में उल्लेखनीय योगदान किया जा सकता है।
वर्ष 1956 के शारीरिक शिक्षा एवं मनोरंजन की राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शारीरिक शिक्षा के व्यावहारिक प्रयोग से बालकों को सामाजिक शारीरिक एवं संवेदनात्मक स्तर पर स्वस्थ बनाना है शारीरिक शिक्षा का लक्ष्य एवं उद्देश्य है।
शारीरिक शिक्षा के लक्ष्य एवं उद्देश्य –
शारीरिक शिक्षा के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को निम्नलिखित रुप में बांटा जा सकता है।
- शारीरिक विकास –
- बौद्धिक या संज्ञानात्मक विकास
- सामाजिक विकास
- भावनात्मक विकास
- स्नान एवं मांसपेशियों का विकास
- खिलाड़ी वृत्ति का विकास
- नेतृत्व क्षमता का विकास
- चारित्रिक और नागरिकता की भावना का विकास
- अनुशासन की भावना का विकास
- स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान का विकास
कहावत
धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया, चरित्र गया तो सब कुछ गया।