योग

शिक्षा की अवधारणा का महत्व | Importance of the Concept of Education Hindi

आधुनिक युग में शिक्षा का महत्व :- शिक्षा को परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण अंग माना गया है। शिक्षा से व्यक्ति मानव जीवन के संकुचित अनुभवों से मुक्ति पा लेता है। समस्याओं से निकलने का उचित तरीका शिक्षा से ही प्राप्त होता है। आज के युग में शिक्षा का महत्व जीवन के हर पहलू में है। […]

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शारीरिक शिक्षा का उद्देश्य | Purpose of Physical Education Hindi

सुनियोजित शारीरिक शिक्षा के द्वारा विद्यार्थियों की व्यक्तित्व के विकास के लिए सभी पहलुओं में उल्लेखनीय योगदान किया जा सकता है। वर्ष 1956 के शारीरिक शिक्षा एवं मनोरंजन की राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शारीरिक शिक्षा के व्यावहारिक प्रयोग से बालकों को सामाजिक शारीरिक एवं संवेदनात्मक स्तर पर

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शारीरिक शिक्षा की परिभाषा | Definition of Physical education hindi

ए आर वेमैंन के अनुसार – शारिरिक शिक्षा,  शिक्षा का वह भाग है जिसके अंतर्गत शारिरिक गतिविधयों द्वारा यक्ति का प्रशिक्षण एवं उसका पूर्ण विकास किया जाता है। जे बी नैस के अनुसार – शारीरिक शिक्षा समूची का वह अंग है जो बड़ी मांस पेशियों से संबंधित क्रियाओं एवं उनसे संबंधित प्रतिक्रियाओ से जुड़ा है।

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बहिष्कृत धौति

कौवे की चोंच के समान ओठों को करके उनके द्वारा वायु का पान करते हुए उदर को भर लें। उस पान की हुई वायु को आधे प्रहर (डेढ घष्टा) तक उदर मे रोक कर परिचालित करते हुए अधोभार्ग से निकाल दे । यह परम गोपनीय विधि बांहेष्कृत धौति कहलाती है। इस अभ्यास को करने के

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प्रोटीन

यदि संतुलित आहार की बात की जाए तो प्रोटीन उनमे एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके बिना हमारे शरीर की कल्पना भी नही की जा सकती है। यदि प्रोटीन ना होतो हमारे शरीर पर मांस भी ना हो। इसके कारण ही मांस और झिल्लियों का निर्माण होता है। मुख्यतः शरीर में किसी भी प्रकार की क्षति

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केनोपनिषद

केनोपनिषद :- यह उपनिषद सामवेद के तलवकार ब्राह्मण के 9वीं अध्याय के अंतर्गत है। तलवार को जैमिनीय उपनिषद भी कहते हैं। केनोपनिषद के चार खंड हैं। उपनिषद में शिष्य गुरु से सवाल करता है कि आंख कान नाक हमारी इंद्रियां किसके द्वारा प्रेरित होती हैं। हमारा प्राण ईश्वर से प्रेरित होता है। ईश्वर ही ब्रह्म

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कठोपनिषद

कठोपनिषद :- यजुर्वेद की कठ शाखा से इसका निर्माण हुआ है। यह दूसरे अध्याय की तीसरी वल्ली है, इसमें वाजश्रवा ऋषि, नचिकेता और यम का संवाद है। वाजश्रवा की कहानी – पुराने समय में यज्ञ के समय कुछ ना कुछ अपनी प्रिय वस्तु दान देने की प्रथा थी। तब वाजश्रवा ऋषि ने बहुत ही बड़ा

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योग की मूलभूत अवधारणाएं | Yog Ki Mulbhut Avdharna in Hindi

योग के आधारभूत तत्व योग की अवधारणा में सबसे पहले योग के अर्थ को जानना सबसे आवश्यक है अलग-अलग ऋषि मुनियों की अलग-अलग परिभाषाएं जैसे योग का अर्थ होता है जोड़ना अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन योग है। महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को रोकना ही योग है। इसी प्रकार गीता में

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ईशावास्योपनिषद क्या है परिचय

ईशावास्योपनिषद शुक्ल यजुर्वेद का 40 वां अध्याय है । इसमें कुल 15 मंत्र हैं । संपूर्ण जगत ईश्वर से बना है, यह एक छोटा उपनिषद है इसमें गीता के 18 अध्याय के 18 मंत्र हैं । इशावस्यम प्रथम मंत्र के होने के कारण इसे ईशावास्योपनिषद कहा जाता है । पूरा जगत ईश्वर के द्वारा निर्मित

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भक्ति क्या है ? भक्ति और भक्त के प्रकार | bhakti kya hai

भक्ति का अर्थ पूजन , वंदना, संगीत, अर्चना करने वाले यह सभी भक्त कहलाते हैं। भजना कर्म करना भगवान की सेवा करना, यह मनुष्य की आवश्यकता है भक्ति की आवश्यकता है जोड़ना, परमात्मा के साथ जुड़ाव को भक्ति योग कहते हैं। भक्ति की परिभाषा जिस कर्म के अनुसार अपने इष्ट की सेवा की जाए उसे

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