कोरोना पर कविता | Poem on Corona Hindi

 है कोरोना क्यों काल बनकर आया तू 
मौत महामारी गम और आंसू साथ लाया तू
मौत महामारी गम और आंसू साथ लाया तू
मौत का तांडव दिखाने तहलका मचाने आया तू
है कोरोना क्यों काल बनकर आया तू 
 है कोरोना क्यों ब्यापार को गिरा दिया 
मानव को लाचार बनाकर
घर में बिठा दिया
जो आया तेरे रास्ते में आया
उसे अस्पताल पंहुचा दिया
 है कोरोना क्यों काल बनकर आया तू
देश के देश निगल गया
शहर के शहर बंद कर गया
किसी को आधा अधुरा
किसी को वीरान कर गया
 ऐसा लगा मानो मानवता का 
नामोनिशान मिटाने आया है
है कोरोना क्यों काल बनकर आया तू
 सदियों तक तेरा ये 
कहर न भूल पाएंगे 
एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को 
रो-रो कर यह दास्तां सुनाएंगे
है कोरोना क्यों काल बनकर आया तू

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