हृदय क्या है? | Hriday kya hai

हृदय शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह पान के पत्ते के आकार का होता है। हृदय परिसंचरण प्रणाली के बीच में स्थित होता है। हृदय शरीर के चारों और रक्त भेजता है रक्त शरीर में ऑक्सीजन भेजता है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालता है। यह एक विशेष प्रकार की पेशियों से बना होता है । जिसे हृदय पेशी कहते हैं।

हृदय का आकार

यह खोखला संकुचनशील मुट्ठी के आकार का होता है । इसका ऊपरी भाग चौड़ा तथा निचला भाग नुकीला होता है । यह 12 से 14 सेंटीमीटर लंबा 9 सेंटीमीटर चौड़ा तथा इसका भार पुरुषों में 100 से 300 ग्राम होता है। तथा महिलाओं में 250 से 275 ग्राम होता है।

हृदय की आंतरिक संरचना

हृदय की आंतरिक संरचना का निर्माण तीन प्रकार से होता है।
पेरिकार्डियम =यह सब से बाहर की परत होती है।
मायोकार्डियम =यह बीच की परत होती है।और यह मोटी होती है व मांसपेशियों से बनी होती है।
एंडोकार्डियम =यह सबसे अंदर की परत होती है। हृदय के कपाट इसी परत में स्थित होते हैं।

हृदय के कपाट (valves)


यह चार प्रकार के होते हैं

  • ट्रिकस्पिड वाल्व
  • पल्मोनरी वाल्व
  • बिकस्पिड वाल्व
  • अरोटिक वाल्व

हृदय के कक्ष

यह चार प्रकार के होते हैं

  • बाया आलिंद
  • बाया निलय
  • दाया आलिंद
  • दाया निलय


हृदय चक्र

मानव शरीर में रक्त की मात्रा 4 से 6 लीटर होती है। किंतु हृदय 1 मिनट में थोड़े से अधिक समय में रक्त को संपूर्ण शरीर में पंप करके एक चक्र को पूरा करता है। एक व्यस्क व्यक्ति प्रतिदिन संपूर्ण शरीर में हृदय के द्वारा 75000 लीटर ब्लड को पंप करता है।स्पंदनकी अवधि में जो परिवर्तन हृदय में आते हैं। उनकी पूर्ण आवृत्ति दूसरे सदन में भी होती है |एक स्पंदन से दूसरे सपन तक हृदय के इन परिवर्तनों की पूर्ण- आवृत्ति को हृदय चक्र कहते हैं।

ह्रदय की क्रिया विधि

हृदय को यदि बीच में से काट कर देखा जाए तो चार कपाट दिखाई देते हैं। ऊपर वाले दो कपाट को अलिंद कहते हैं तथा नीचे वाले दो कपाट को निलय कहते हैं दाएं तरफ वाले अलिंद को दाया अलीम तथा बाएं तरफ वाले स्थित अलिंद को बाया अलिंद कहते हैं।इसी प्रकार दाएं तरफ स्थित दाएं निलय कहते हैं और बाएं तरफ स्थित वाले को बाया निलय कहते हैं।

आलिंद निलय से छोटे होते हैं । बाय निलय की दीवार सबसे मोटी होती है और चौड़ी होती है। क्योंकि उसे सारे शरीर को रक्त भेजना होता है। दोनों और के अलिंद अपनी तरफ के निलय मैं एक छेद द्वारा खुलते हैं। दाहिने तरफ वाले छेद में तीन कपाठ होते हैं। इसीलिए इसे ट्रिकस्पिद वाल्व कहते हैं । बाय छेद में दो कपाट होते हैं।इसीलिए इसे बाइकस स्पिट्र वाल्व कहते हैं। दाएं अलिंद में दो छेद होते हैं। जिनके द्वारा शरीर के सभी भागों में दो महासिरायो में लाया गया रक्त एकत्रित होता है।
दाहिने नीले में एक छेद होता है।जिससे रक्त दो पलमोनरी अर्ट्री द्वारा फेफड़ों में जाता है।

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